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लेखनी प्रतियोगिता -10-Sep-2022

सहने लायक नहीं है फिर भी हम सह रहे है

कहने लायक नहीं है फिर भी हम कह रहे है 

क्या हुआ आंखो से आंसू नहीं बह रहे 
फिर भी बदन का दर्द हम सह रहे है

अब तो दवा, दुआ सब काम करना बंद हो गया है 
अब तो तुम्हारे इश्क का मरीज बनकर हम रह रहे है

क्या हुआ अगर हमारे दर्द कभी कम ना हो सके
तुमसे प्रेम कभी कम ना होगा जबान हम दे रहे है

अब तो जिंदा भी हूं तो सिर्फ तेरे लिए हयात
विशाल तुमसे इश्क है जाने कब से हम कह रहे है ।

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12 Comments

उम्दा सृजन,,,, जबान हम दे रहे हैं,,,,,, देह लिख दिया है ठीक करें जी

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SHAYAR VISHU KING

12-Sep-2022 06:38 PM

केवल मैं कड़ी मिलाने के लिए लिखा था मगर आपने मेरी खामियां पकड़ ही ली बेहद उम्दा यहां अच्छे पढ़ने वाले ही नहीं बल्कि सिखाने वाले भी हैं ♥️🙏

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Ajay Tiwari

11-Sep-2022 09:29 AM

Nice one

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Abhinav ji

11-Sep-2022 08:41 AM

Nice

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